बिखर जाते हैं...... सर से पाँव तक, वो लोग... जो किसी बेपरवाह से बेपनाह इश्क करते है

एक उम्मीद मिली थी तुम्हारे आने से अब वो भी टूट गई वफादारी की आदत थी हमें अब शायद वो भी छूट गई 

जिनके करीब बहुत लोग हो उनसे दूर रेहना ही ठीक है

एक दूसरे से मोहब्बत कुछ ऐसी हो गयी है, दिल तो दो है मगर धड़कन एक हों गयी है

खुदकुशी की हिम्मत नही है मुझ में, बस दुआ है कोई हादसा हो जाए

ज़रा छू लूँ तुमको कि मुझको यकी जाये. आ लोग कहते हैं मुझे साये से मोहब्बत है

तेरे अहसास की खुशबू रग रग में समाई है, अब तू ही बता क्या इसकी भी कोई दवाई है

प्यार का पता नही जिंदगी  हो तुम.. जान का पता नही दिल की धड़कन हो तुम

मैंने जिसे चाहा उसने चाहा किसी और को रब करे जिसको उसने चाहा वह भी चाहे किसी और को

लगता है इस बादल का भी दिल टूटा है, बोलता कुछ भी नहीं बस रोये जा रहा है

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