तन्हाई शायरी 

मेरी तन्हाई को मेरा शौक न समझना, बहुत प्यार से दिया है ये तोहफा किसी ने

तन्हाई शायरी 

इस तरह हम सुकून को महफूज़ कर लेते हैं, जब भी तन्हा होते हैं तुम्हें महसूस कर लेते हैं

तन्हाई शायरी 

यादों में आपके तनहा बैठे हैं, आपके बिना लबों की हँसी गँवा बैठे हैं, आपकी दुनिया में अँधेरा ना हो, इसलिए खुद का दिल जला बैठे हैं

तन्हाई शायरी 

रोते हैं तन्हा देख कर मुझको वो रास्ते, जिन पे तेरे बगैर मैं गुजरा कभी न था

तन्हाई शायरी 

तेरे वजूद की खुशबु बसी है साँसों में, ये और बात है नजरों से दूर रहते हो

तन्हाई शायरी 

मैं हूँ दिल है तन्हाई है, तुम भी होते अच्छा होता

तन्हाई शायरी 

तन्हाई की आग में कहीं जल ही न जाऊँ, के अब तो कोई मेरे आशियाने को बचा ले

तन्हाई शायरी 

अब तो याद भी उसकी आती नहीं, कितनी तनहा हो गई तन्हाईयाँ 

तन्हाई शायरी 

लाज़िम नहीं कि उसको भी मेरा ख्याल हो ! मेरा जो हाल है वही उसका भी वही हो 

तन्हाई शायरी 

मैंने तन्हाई में हमेशा तुम्हे पुकारा है, सुन लो गौर से ऐ सनम, तेरे बिना ज़िंदगी अधूरी सी लगती है

तन्हाई शायरी 

मैं तन्हाई को तन्हाई में तनहा कैसे छोड़ दूँ ! इस तन्हाई ने तन्हाई में तनहा मेरा साथ दिए है

तन्हाई शायरी 

इस तन्हाई का हम पे बड़ा एहसान है साहब न देती ये साथ अपना तो जाने हम किधर जाते

तन्हाई शायरी 

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