हम समझदार भी इतने हैं के उनका झूठ पकड़ लेते हैं और उनके दीवाने भी इतने के फिर भी यकीन कर लेते है

दौलत नहीं शोहरत नहीं,न वाह चाहिए “कैसे हो?” बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए

कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती है कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता

जब से तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ से लगाई है मीठा सा गम  मीठी सी तन्हाई है।

पलक से पानी गिरा है, तो उसको गिरने दो, कोई पुरानी तमन्ना, पिंघल रही होगी।

दर्द हल्का है साँस भारी है, जिए जाने की रस्म जारी है

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश  की बूँद को इस ज़मीन से, यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है!

आप के बाद हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है