Gulzar shayari 

in Hindi

"आइना देख कर तसल्ली हुई, हम को इस घर में जानता है कोई"

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Gulzar shayari 

in Hindi

मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता, हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है

Gulzar shayari 

in Hindi

मैंने "दबी" आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो? "नज़रें" झुका कर वो बोली ! "बहुत"

Gulzar shayari 

in Hindi

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत, मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

Gulzar shayari 

in Hindi

"मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं, हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं"

Gulzar shayari 

in Hindi

"उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और, ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे"

Gulzar shayari 

in Hindi

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