Sad Shayari

मोतियों से पिरोया मोहब्बत को मैंने बस भूल इतनी हुई धागा कच्चा चुन लिया मैंने

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इश्क़ की हमारे बस इतनी सी कहानी है  तुम बिछड़ गए हम बिख़र  गए तुम मिले नहीं और  हम किसी और के हुए नहीं

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जब कभी फुर्सत मिले मेरे दिल का बोझ उतार दो, मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो

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उतार फेंक दी उसने तोहफे में मिली पायल, उसे डर था छनकेगी तो याद आ जाऊँगा मैं

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अब आईने के आगे नहीं जाता हूँ उसका नाम सुन के  सँवर जाता हूँ वो शायद इसलिए खुश होती मुझे नींद में देखकर मैं ऐसे सोता हूँ जैसे मैं मर जाता  हूँ

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मुझे उसके आँचल का आशियाना न मिला, उसकी ज़ुल्फ़ों की छाँव का ठिकाना न मिला, कह दिया उसने मुझको ही बेवफा… मुझे छोड़ने के लिए कोई बहाना ना मिला

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