तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती मैं राख होने लगा हूँ दिए जलाते हुए..

ये मत सोचना कि आस छोड़ दी है बस अब मैंने तेरी तलाश छोड़ दी है

लगता है इस बादल का भी दिल टूटा है, बोलता कुछ भी नहीं बस रोये जा रहा है ।

पूछा किसी ने कि याद आती है उसकी मैं मुस्कुराया और बोला तभी तो जिंदा हुँ

वो मिल गया है, तो क़दर करो अगर नहीं मिला, तो सब्र रखो

तुम्हें इस कदर हम अपना मान बैठे हैं कि तुमसे किसी की भी नज़दीकी हम बर्दाश्त नहीं कर सकते

अगर किस्मत में हुआ, तो फिर मिलेंगे अजनबी बनकर

एक आईना है मेरे कमरे में... जो तुम्हारी उतारी हुई बिंदी के इंतज़ार में खामोश पड़ा है...

बला सी खुबसूरती हैं तेरे जिस्म मे, कोई छू ले तो चिंगारी से आग बन जाती हैं।

अजीब तमाशा उस चाहने वाली ने किया जान भी निकाल लि जिन्दा भी छोर दिया

ख़ामोश रहना ही बेहतर है बात तो वैसे भी कोई नहीं समझता

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