हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़', जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे, तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे, जो रंज की घड़ी भी ख़ुशी से गुज़ार दे

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया, तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया

लिपट जाते हैं वो बिजली के डर से, इलाही ये घटा दो दिन तो बरसे

तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता, वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता

कहते है उसे जबाने उर्दू जिसमे न हो रंग फ़ारसी का

यह क्या कहा कि दाग को पहचानते नहीं वो एक ही तो शख्स है, तुम जानते नहीं ?

हर वक़्त पढ़े जाते है 'दाग' के अशआर क्या तुमको कोई और सुखनवर नहीं मिलता

दिल में समां गई है, क़यामत की शोखियाँ दो चार दिन रहा था किसी की निगाह में

यह काम नहीं आसाँ इंसान को, मुश्किल है, दुनिया में भला होना, दुनिया का भला करना

अल्लाह का घर काबे को कहते है वो लेकिन देता है पता और वो मिलता है कही और

फलक देता है जिनको ऐश उनको ग़म भी होते है जहा बजते है नक्कारे वहा मातम भी होते है

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