Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

गुनाह कुछ ऐसे हुए हमसे अनजाने में,

फूलों का कत्ल कर बैठे पत्थरों को मनाने में,

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

अच्छे तो सभी है यहां बस 

पहचान बुरे वक्त में होती है

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

कितना मुश्किल है उस इंसान को मनाना

 जो रूठा भी ना हो और बात भी ना करें

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

उसने पूछा तोहफ़े में तुम्हें क्या चाहिए

हमने कहा वो मुलाक़ात जो कभी ख़त्म ना हो

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

वक्त लगेगा तुझे भुलाने में 

यही सोच रहा हूं मैं कई सालों से

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

जिस इंसान को हमें खोने का डर ही ना था 

उस इंसान को हमारे ना होने का अफसोस क्या होगा

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

अगर वो मेरा ही नहीं तो लड़ाई कैसी

 और सच सामने आ ही जाए फिर सफ़ाई कैसी

gulzar sad shayari

 

किसी के कपड़े उतारना वफ़ा का सबूत नहीं 

किसी का पल्लू संभाल सको तभी इश्क़ करना

Gulzar Sad Shayari | Gulzar shayari in Hindi

 

“बे वजह घर से निकलने की ज़रूरत क्या है:- Gulzar Shayari

“बे वजह घर से निकलने की ज़रूरत क्या है”
“मौत से आँखे गिलाने की ज़रूरत क्या है”
“सब को मालूम है बाहर की हवा है क़ातिल”
“यही क़ातिल से उलझने की ज़रूरत क्या है”
“ज़िन्दगी एक नेमत है उसे सम्भाल के रखों”
“क़ब्रगाहों को सजाने की ज़रूरत क्या है”
“दिल बहलाने के लिये घर में वजह हैं काफ़ी”
“यूँही गलियों में भटकने की ज़रूरत क्या है”

 

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Gulzar Shayari In Hindi

 

 

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