स्वंय से दूर हो तुम भी स्वंय से दूर है हम भी
बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर है हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी अ
तः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर है हम भी


कुमार विश्वाश का जन्म भारत में उत्तर प्रदेश पिलखुआ, ग़ाज़ियाबाद जिले में 10 फरवरी 1970 को एक मध्यवर्गी परिवार में हुआ, उनके पिता डॉ॰ चन्द्रपाल शर्मा है और माताजी का नाम श्रीमती रमा शर्मा है। कुमार विश्वाश भारतीय कवी , सामाजिक कार्यकर्ता ,वक्ता  है। वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। कुमार विश्वाश युवाओ के प्रशिद्ध कवी है। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि जापान, अमेरिका, दुबई और सिंगापुर जैसे विदेशी देशों में भी प्रदर्शन किया है। यह डॉ के लिए सबसे बड़ी सफलता है। कुमार विश्वास ने कहा कि वह विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें अत्याधुनिक हिंदी काव्यलोक में अब ‘सरस्वती का वरद पुत्र’ कहा जाता है।   कुमार विश्वास जी ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय विद्यालय, पिलखुआ से प्राप्त की। कुमार विश्वाश पिलखुआ के एक कॉलेज में प्रवक्ता रहे।  कुमार विश्वास की पत्नी का नाम मंजू शर्मा है। वे चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कुमार विश्वाश ने राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से इण्टर की बारहवीं उत्तीर्ण की।  इसके पिता उन्हें  एक इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे , परन्तु कुमार विश्वाश जी का मन इंजीनियर में नहीं लगा और उन्होंने बीच में ही इंजीनियर की पढ़ाई छोड़ दी। बाद में कुमार विश्वाश जी ने आर एस एस डिग्री कॉलेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ  से ली।

इस पोस्ट में, हम हिंदी और अंग्रेजी में कुमार विश्वाश  की सभी शायरी प्रदान कर रहे हैं। आमतौर पर, वह रिश्ते और प्यार के कवि हैं और आपको इसे पढ़ने के बाद बहुत अच्छा लगेगा।


Kumar Vishwas Shayari :- कोई दीवाना कहता हैं, कोई पागल समझता हैं,

 

कोई दीवाना कहता हैं, कोई पागल समझता हैं,
मगर धरती की बेचैनी को बस बदल समझता हैं !




Dr, KUMAR VISHWAS SHAYARI AND GAZAL

 

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी हैं,
ये तेरा दिल समझता हैं या मेरा दिल समझता हैं !!

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी हैं ,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी हैं ,
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों मैं आसूं हैं ,
जो तू समझे तो मोती हैं जो न समझे तो पानी हैं !

समंदर पीर का अंदर हैं लेकिन रो नहीं सकता,
ये आंसूं प्यार का मोती हैं इसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुनले,
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता !

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल मैं कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,
अभी तक डूब के सुनते सब किस्सा मोह्हबत का,
मैं किस्से को हक़ीक़त मैं बदल बैठा तो हंगामा !

कोई दीवाना कहता हैं, कोई पागल समझता हैं,
मगर धरती की बेचैनी को बस बदल समझता हैं !

 

 कुमार विश्वास की ग़ज़ल: मैं तो झोंका हूं हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा

 

मैं तो झोंका हूं हवाओं का उड़ा ले जाऊंगा
जागती रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊंगा

हो के क़दमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा
ख़ाक में मिल कर भी मैं ख़ुशबू बचा ले जाऊंगा

कौन सी शय मुझ को पहुंचाएगी तेरे शहर तक
ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊंगा

कोशिशें मुझ को मिटाने की भले हों कामयाब
मिटते-मिटते भी मैं मिटने का मज़ा ले जाऊंगा

शोहरतें, जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गए
सब यहीं रह जाएंगी मैं साथ क्या ले जाऊंगा

Kumar Vishash New Shayari

पनाहों में जो आया हो,
उस पर वार क्या करना
जो दिल हारा हुआ हो,
उस पे फिर से अधिकार क्या करना,
मोहब्बत का मज़ा तो,
डूबने की कशमकश में है,
जो हो मालूम गहरायी,
तो दरिया पार क्या करना

मेरे जीने मरने में,
तुम्हारा नाम आएगा,
मैं सांस रोक लू फिर भी,
यही इलज़ाम आएगा,
हर एक धड़कन में जब तुम हो,
तो फिर अपराध क्या मेरा,
अगर राधा पुकारेंगी,
तो घनश्याम आएगा”

पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना,
जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना !
मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,
हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना !!”

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,
मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है,
कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,
सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है..!!”
ना पाने की खुशी है कुछ, ना खोने का ही कुछ गम है
ये दौलत और शोहरत सिर्फ, कुछ ज़ख्मों का मरहम है
अजब सी कशमकश है,रोज़ जीने, रोज़ मरने में
मुक्कमल ज़िन्दगी तो है, मगर पूरी से कुछ कम है

“मेरा जो भी तर्जुबा है, तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छु गया था तब, की अब तक गा रहा हूँ मैं
बिछुड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तडपे
जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझा रहा हु मैं”

Kumar Vishwash Shayari “भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा”


“भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा”

“वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है।”